
मिला वो भी नहीं करते, मिला हम भी नहीं करते..
मैं कमजोर नहीं हूँ.... जिसके कारण कमजोर बना था, अब वह इतना दूर है की कमजोर होने का कारण ही नहीं है.



इतनी बड़ी धरती हमारी
और छोटे से हम....
मानव, पशु, और पक्षी,
लाखों जीवों का यह घर..
धरती पर, धरती के नीचे,
कुछ रहते धरती के उपर |
सब में जीवन, सब हैं बराबर,
नहीं है कोई कम..
इतनी बड़ी धरती हमारी,
और छोटे से हम ||
रंग-बिरंगे, कीट , पतंगे,
माघ, गगन पंछी मंडराते |
दाने दो ही चुगते लेकिन,
मीठे, लंबे गीत सुनाते ||
डगमग चलते, नाचा करते
खुश रहते हैं वो हर दम |
इतनी बड़ी धरती हमारी,
और छोटे से हम |
कई, घास, पौधे नन्हे,
जीवन रक्षक वृक्ष हुमारे..
रोटी. दाल, सब्ज़ी, फल,
जीवन के ये श्रोत हुमारे |
जब तक भूमि हरी रहेगी,
तब तक स्वस्थ रहेंगे हम,|
इंतनी बड़ी धरती हमारी.....

रूठी तन्हाइयों में,दर्द की बाहों में सिमटे,
कहीं मंज़िल हम तलाश रहे है |
लवों पे तीखी शराब को चूमे,
हम नशे मे झूम रहे है ||
क्या कहती है तू ज़िंदगी,
सब सहती है तू ज़िंदगी,
थम थम के चलती है ये धडकनें |
हम अचम्भित है की,
रुकती क्यों नही ये धडकनें,
कही हमने ज़ायदा तो नही पी ली है ||
आंखों से छलकते है अंगारे,
ये आँखें सदा के लिए,
बंद होते क्यों नही |
हम जी रहे है बिना सहारे,
कहीं यही तो जीना नही,
हर जाम से लगता है,
दर्द हलके हो रहे है ||
वो कहते है,
इतनी पिया ना करो |
घुट घुट के यों जीया ना करो,
हमसे बर्दास्त नहीं होती ये जुदाई ,
पीते रहेंगे तो जीते रहेंगे,
खुद को पल पल यही दिलासा दे रहे है.........